विद्यार्थी कोष एवं विकास कोष से व्यय – शिक्षा विभाग के आदेशों सहित सम्पूर्ण गाइड


विद्यार्थी कोष एवं विकास कोष से व्यय की प्रक्रिया – शिक्षा विभाग के आदेशों सहित सम्पूर्ण जानकारी 

जानें कि विद्यार्थी कोष एवं विकास कोष से किस प्रकार व्यय किया जाता है। शिक्षा निदेशालय द्वारा जारी आदेशों के अनुसार विद्यालयों में कोष के उपयोग की संपूर्ण जानकारी


1. प्रस्तावना

विद्यालयों में शिक्षा व्यवस्था को सुचारू रूप से चलाने के लिए सरकार द्वारा दो प्रमुख कोष बनाए गए हैं –


विद्यार्थी कोष (Chhatra Kosh / Student Fund)


विकास कोष (Vikas Kosh / Development Fund)


इन दोनों कोषों का उपयोग निदेशालय शिक्षा विभाग (राजस्थान) द्वारा जारी आदेशों/परिपत्रों के अनुसार किया जाता है। यह सुनिश्चित किया जाता है कि धनराशि का उपयोग केवल विद्यार्थियों के हित और विद्यालय के विकास में हो।


2. विद्यार्थी कोष (Chhatra Kosh) से व्यय

निदेशालय शिक्षा विभाग के आदेशानुसार, विद्यार्थी कोष का उपयोग मुख्यतः विद्यार्थियों की शैक्षणिक एवं सह-पाठयक्रम गतिविधियों पर किया जाता है।


विद्यार्थी कोष से होने वाले व्यय

शैक्षणिक सामग्री

चॉक, डस्टर, चार्ट, मॉडल, प्रयोगशाला सामग्री

लाइब्रेरी के लिए पुस्तकें

सांस्कृतिक एवं सह-पाठ्यक्रम गतिविधियाँ

वाद-विवाद, भाषण, निबंध प्रतियोगिता

वार्षिकोत्सव, स्वतंत्रता दिवस, गणतंत्र दिवस समारोह

खेलकूद गतिविधियाँ

खेल सामग्री (गेंद, बैट, नेट आदि)

विद्यार्थियों को खेल प्रतियोगिताओं में भाग लेने हेतु सहायता

स्वास्थ्य एवं स्वच्छता

फर्स्ट एड बॉक्स

शुद्ध पेयजल एवं सफाई सामग्री

विशेष सहायता

निर्धन विद्यार्थियों को मदद

छात्र परिषद गतिविधियाँ


3. विकास कोष (Vikas Kosh) से व्यय

शिक्षा निदेशालय, राजस्थान द्वारा जारी आदेशों के अनुसार, विकास कोष का उपयोग मुख्य रूप से विद्यालय के बुनियादी ढाँचे और स्थायी विकास कार्यों के लिए किया जाता है।


विकास कोष से होने वाले व्यय

भवन निर्माण एवं मरम्मत


कमरों, फर्श, छत, पेंटिंग


शौचालयों का निर्माण/सुधार


फर्नीचर एवं उपकरण


बेंच, टेबल, कुर्सियाँ, आलमारी


कम्प्यूटर, प्रोजेक्टर, स्मार्ट क्लास हेतु उपकरण


जल एवं स्वच्छता व्यवस्था


टंकी, हैंडपंप, आरओ मशीन


शौचालय की सफाई एवं रखरखाव


विद्यालय परिसर विकास


बाउंड्रीवाल, गेट, पौधारोपण, खेल मैदान


विद्युत एवं तकनीकी सुविधाएँ


पंखे, ट्यूबलाइट, इन्वर्टर


सोलर लाइट, इंटरनेट सुविधा


4. व्यय की प्रक्रिया (शिक्षा निदेशालय आदेशानुसार)

समिति की स्वीकृति:

विद्यालय प्रबंधन समिति (SMC/SDMC) या संबंधित समिति से स्वीकृति लेना अनिवार्य है।


लेखांकन:

सभी खर्च का लेखा कैशबुक एवं रजिस्टर में दर्ज करना होगा।


आदेश संदर्भ:

शिक्षा निदेशालय समय-समय पर आदेश/परिपत्र जारी करता है, जिनमें यह स्पष्ट किया जाता है कि विद्यार्थी कोष व विकास कोष का उपयोग कहाँ और कैसे किया जाएगा।


ऑडिट एवं निरीक्षण:

उच्च अधिकारियों द्वारा समय-समय पर निरीक्षण एवं ऑडिट किया जाता है।


5. आदेशों का संदर्भ (Reference of Directorate Orders)

शिक्षा निदेशालय, राजस्थान द्वारा जारी परिपत्रों में स्पष्ट उल्लेख है कि –


विद्यार्थी कोष केवल विद्यार्थियों की शैक्षणिक, सांस्कृतिक एवं खेल गतिविधियों पर व्यय होगा।


विकास कोष का उपयोग केवल बुनियादी ढाँचे, मरम्मत एवं स्थायी विकास कार्यों में किया जाएगा।


व्यय का पूर्ण पारदर्शिता एवं लेखा-जोखा रखना विद्यालय प्रधानाध्यापक/प्राचार्य की जिम्मेदारी होगी।


निष्कर्ष

विद्यार्थी कोष का उद्देश्य विद्यार्थियों की शैक्षणिक, सांस्कृतिक एवं खेल गतिविधियों को प्रोत्साहन देना है, जबकि विकास कोष विद्यालय की अधोसंरचना और दीर्घकालीन सुविधाओं के विकास हेतु है। निदेशालय शिक्षा विभाग के आदेशों के अनुसार इन दोनों कोषों का पारदर्शी एवं नियमानुसार उपयोग करने से विद्यालय की शिक्षा व्यवस्था और विद्यार्थियों का विकास सुचारू रूप से होता है

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विभागीय आदेश 

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